अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के एकतरफा पैरोकार
डॉ.बचन सिंह सिकरवार हाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक पोस्ट करने मामले में कथित पत्रकार प्रशान्त जगदीश कन्नौजिया की गिरफ्तारी को प्रथम दृष्टया अनुचित मानते हुए उच्चतम न्यायालय ने उन्हें जमानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश अवश्य दिया, किन्तु उसने सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट या ट्वीट का समर्थन नहीं किया है। इस बारे में उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर किया है कि जो मामला कन्नौजिया के विरुद्ध न्यायालय में चल रहा है, वह चलता रहेगा। हालाँकि प्रशान्त कन्नौजिया जमानत पर रिहा होकर बाहर आ गए हैं,लेकिन उनकी गिरफ्तारी को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तथाकथित पैरोकारों ने बगैर उनकी हकीकत जाने ऐसा हाहाकार/कोहराम मचाया, जैसे देश में अभिव्यक्ति स्वतंत्रता का गलाघोंट दिया गया हो। लेकिन देश में कोई भी ऐसा संगठन आगे नहीं आया, जिसने उनसे यह प्रश्न किया हो कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ भी कहने-बोलने पर पाबन्दी क्यों नहीं होनी चाहिए, जिससे जातिगत, धा...