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अमेरिका का चीन को सही जवाब

अपराजेय योद्धा महाराणा प्रताप

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 9 मई जन्मतिथि पर विशेष                           महाराणा प्रताप पूरे विश्व के अगणित  देशभक्त योद्धाओं में उन विरले योद्धाओं में से एक हैं, जिन्होंने दुनिया के तमाम सुख-सम्पदा, ऐश्वर्य, वैभव को तिलांजलि देते हुए स्वयं से कई गुणा धन, सैन्य बल,शस्त्र बल और विशाल साम्राज्य के शासक की अधीनता स्वीकार न कर, अपने देश और स्वयं की स्वतंत्रता के लिए अनेकानेक अभावों के रहते उससे युद्ध करना श्रेयस्कर समझा। महाराणा प्रताप वीर, धीर, महावीर, पराक्रमी, अदम्य साहसी, शौर्यवान, स्वाभिमानी, बलशाली, अपराजेय योद्धा, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने में प्रवीण, विशिष्ट रणनीतिकार, युद्धकला में परांगत योद्धा ही नहीं थे,बल्कि कुशल, न्यायप्रिय, प्रजावत्सल्य शासक,स्थापत्य कला, कला,साहित्य प्रेमी भी थे। महाराणा प्रताप ने कभी भी मुगल सम्राट अकबर के सामने सिर नहीं झुकाया। उनकी जीवन सादगी, साहस और देशप्रेम की सर्वोच्च मिसाल है। ये मेवाड़ के सिसौदिया वंश के तेरहवें राजपूत शासक थे, जो वीरता, स्वाभिमान और मुगल सम्राट अकबर के खिलाफ संघर्ष के प्...

‘आखिर क्या चाहते हैं इस मुल्क के मुसलमान ?

डॉ.बचन सिंह सिकरवार हाल में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र में सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस, सहयोगी काँग्रेस समेत मुख्य विपक्षी राजनीतिक दल ‘पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’(पी.डी.पी.), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, निर्दलीय विधायकों द्वारा ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के विरोध और ईरान के प्रति सहानुभूति में काली पट्टी बाँधने, ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के चित्र और अमेरिका के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर  लिए जिस तरह ‘ट्रम्प हाय-हाय‘, ‘ईरान जिन्दाबाद‘, ‘नारा-ए-तकबीर,अल्लाह हो अकबर’ जैसे नारे लगाना और फिर उनके विरोध में भाजपा के विधायकों द्वारा ‘वन्दे मातरम्’, ‘भारत माता की जय’ नारे लगाए जाना और ईरान पर हमलों के खिलाफ सदन में चर्चा की माँग की गई, इस घटना से अपने देश के लोगों को भले ही दुःख और आश्चर्य नहीं हुआ हो, किन्तु उनके इस अनुचित रवैये पर दुनियाभर के लोगों को  अचम्भा ही नहीं, उनकी अपने देश के प्रति निष्ठा पर भी सन्देह जरूर हो रहा होगा? इस मुद्दे पर दुनिया भर में सिर्फ पाकिस्तान के शियाओं और भारत के शिया समेत दूसरे मुसलमानों के अलावा किसी भी मुस्लिम देश ने ईरान पर अम...

वन विहार में जगद्गुरू निंबार्काचार्य श्रीमन्मुकुंद देवाचार्य महाराज का द्वादश दिवसीय पाटोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

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(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी) वृन्दावन।रमणरेती-परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन वन विहार (आचार्य पीठ टोपी कुंज) में अनंतश्री विभूषित जगद्गुरू निंबार्काचार्य श्रीमन्मुकुंद देवाचार्य सेवा समिति चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) के द्वारा आद्याचार्य अनंतश्री विभूषित जगद्गुरू निंबार्काचार्य श्रीमन्मुकुंद देवाचार्य महाराज का द्वादश दिवसीय पाटोत्सव जगदगुरू निंबार्काचार्य श्रीश्रीललिताशरण देवाचार्य महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।इसके साथ ही महोत्सव के अंतर्गत चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा, श्रीमहावाणी पाठ, समाज गायन, श्रीहरिराम संकीर्तन आदि के आयोजन भी संपन्न हुए। इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए वन विहार के अध्यक्ष श्रीश्रीललिताशरण देवाचार्य महाराज ने कहा कि वन विहार (आचार्य पीठ टोपी कुंज) निंबार्क संप्रदाय का प्रमुख केंद्र हैं।जो कि अनेकों वर्षों से निंबार्क संप्रदाय के संवर्धन, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में लगा हुआ है। प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीधाम वृन्दावन उत्सवों की भूमि है।इस पावन  ...

रसिक त्रिवेणी से जुड़ी हुई थीं निकुंज वासिनी श्रीमती कमला देवी नागार्च

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(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी) वृन्दावन।गुरुकुल रोड स्थित गणेशी लाल अग्रवाल अतिथि भवन (दाऊजी की बगीची) में हित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट एवं श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।जिसमें प्रियावल्लभ कुंज के अध्यक्ष आचार्य विष्णु मोहन नागार्च की माताजी श्रीमती कमला देवी नागार्च के आकस्मिक निकुंज गमन पर शोक व्यक्त किया गया।साथ ही प्रमुख संतों, विद्वानों, धर्माचार्यों, समाजसेवियों व राजनेताओं के द्वारा उनके चित्रपट के समक्ष पुष्प चढ़ा कर अपनी श्रद्धांजलि व भावांजलि अर्पित की गई। सभा में परम् हितधर्मी डॉ. चन्द्र प्रकाश शर्मा ने कहा कि निकुंज वासिनी श्रीमती कमला देवी नागार्च रसिक त्रिवेणी से जुड़ी हुई थीं। श्रीधाम वृन्दावन की प्राचीन हरित्रयी उपासनाओं से उनका गहरा संबंध था। श्रीहरिराम व्यासजी महाराज के वंश में उनका जन्म हुआ। 18 वीं शताब्दी के प्रख्यात सन्त एवं वाणीकार श्रीहित परमानंद महाराज (प्राचीन श्रीराधा वल्लभीय परिवार) के वंश में उनका विवाह हुआ और उनके पूज्य परदादा ससुर संत शीतल दास महाराज टटिया स्थान (श्रीहरिदासी परम्परा) के आचार्य गद्दी के महंत थे।जिन...

अत्यन्त सेवाभावी व धर्म परायण महिला थीं निकुंज वासिनी कमला देवी नागार्च : डॉ. गोपाल चतुर्वेदी

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गणेशी लाल अग्रवाल अतिथि भवन (दाऊजी की बगीची) में 29 अप्रैल को आयोजित होगी श्रद्धांजलि सभा वृन्दावन।छीपी गली/पुराना बजाजा स्थित प्रियावल्लभ कुंज में आचार्य विष्णु मोहन नागार्च की माताजी श्रीमती कमला देवी नागार्च का 97 वर्ष की आयु में 27 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निकुंज गमन हो गया है।उनका इलाज दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में चल रहा था।उनका निधन हरिवंश महाप्रभु जयंती से एक दिन पूर्व वृंदावन स्थित प्रिया वल्लभ मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन करते समय हुआ। वे उसी दिन दिल्ली से वृंदावन आई थीं।उनकी अंत्येष्टि  हरिवंश महाप्रभु जयंती ( एकादशी ) के दिन यमुना तट पर अत्यंत गमगीन माहौल में वैदिक रीति रिवाज के साथ हुई।वे अपने पीछे पुत्र, पौत्र, पौत्री, पंथी आदि का भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं।उनके एक पौत्र श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च श्रीमद्भागवत के जाने-माने कथा प्रवक्ता है। एक पौत्र मथुरा वृंदावन नगर-निगम के पूर्व पार्षद एवं भाजपा के प्रख्यात राजनेता हैं।उनके अंतिम संस्कार के समय परिवार जनों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोप...

कोई आजम खाँ से यह सवाल क्यों नहीं करता ?

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                    डॉ.बचन सिंह सिकरवार आजकल  समाजवादी पार्टी के सांसद और इसी पार्टी की उ.प्र. सरकार के नगर विकास मंत्री रहे  मुहम्मद आजम खाँ  द्वारा  रामपुर में बनायी मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से सम्बन्धित  खबरें समाचार पत्रों और टी.वी.चैनलों में आती ही रहती हैं। इसका कारण मुहम्मद आजम खाँ द्वारा अपने राजनीतिक प्रभाव का बेजां इस्तेमाल कर गैरकानूनी तरीकों से इस यूनिवर्सिटी के लिए सरकारी और गैर सरकारी भूमि हथियाना है। सत्ता बदलने के बाद पीड़ितों द्वारा उनके खिलाफ अब तक 29 मुकदमें दर्ज हो चुके हैं,जिनकी शिकायतें सपा सरकार में उनके दबदबे के चलते कहीं क्या,मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक सुनने को तैयार नहीं थे। इस कारण अब राज्य सरकार ने उन्हें ‘भू माफिया’ घोषित किया हुआ है। अब अपने को मजलूम बताते हुए मुहम्मद आजम खाँ यह कहते फिर रहे हैं कि तालीम की रोशनी फैलाने के पाक और नेक मकसद से तामीर करायी उनकी यूनिवर्सिटी को  राज्य सरकार बन्द और बर्बाद कराने पर आमादा है और उन्हें बेवजह सताया जा रहा है।     ...

कौन हैं अनुच्छेद 370 को बरकरार रखने के हिमायती?

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                      डॉ.बचन सिंह सिकरवार  गत 5 अगस्त को केन्द्र सरकार के जम्मू-कश्मीर की अनुच्छेद 370 तथा 35ए खत्म किये जाने और इस सूबे को विभाजित कर दो केन्द्र प्रशासित राज्य घोषित करने पर आए दिन भारत सरकार को चुनौती देने वाली घाटी आधारित सियासी पार्टियाँ नेशनल कान्फ्रेंस, पी.डी.पी., पीपुल्स कॉन्फ्रेंस समेत  अलगाववादियों,  पाकिस्तानपरस्तों को भारी धक्का और गहरा सदमा लगा है। उन्होंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि कभी कोई सरकार उनके द्वारा मुल्क के बँटवारे से लेकर इस सूबे को अपनी जागीर की तरह राज करने ही नहीं,उसमें दारुल इस्लाम/निजाम-ए-मुस्तफा लाने के लिए तथाकथित विशेष पहचान(मुस्लिम बहुल/हिन्दूविहीन) बनाये रखने के कश्मीरियत, जम्हूरियत, इन्सानियत की ओट में भारतीय संविधान में पहले अनुच्छेद 370 और उसके बाद अनुच्छेद 35ए जोड़ने और बचा रखने की हर तिकडम के बाद भी उन्हें एक ही झटके में खत्म कर देगी। इससे भी ज्यादा हैरानी उन्हें यह देखकर हो रही है कि केन्द्र सरकार के इतने बड़े फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में कहीं कोई पत्ता तक क...

अफगानिस्तान में संकट बढ़ने के आसार

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                                 डॉ.बचन सिंह सिकरवार अब अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने चुनावी वादे को पूरा करने की गरज से किसी भी तरह अफगानिस्तान से अमेरिकी और ‘उत्तर अटलाण्टिक सन्धि संगठन’(नाटो)की सेनाओं की किसी भी तरह सुरक्षित वापसी के लिए बेताब हैं ,इसके लिए उन्हें अपने ही पैदा किये भस्मासुर ‘तालिबान’ से न केवल उसकी शर्तों पर समझौता करने से गुरेज है और न शर्मिन्दगी ही। यहाँ तक कि उसे अब अफगानिस्तान के भविष्य की भी परवाह नहीं है। इस मुल्क में सन् 2001से तैनात  अपने सैनिकों में से 2,400 को गंवाने के बाद भी वह खाली हाथ लौटने को मजबूर है। अमेरिका जिस आतंकवाद को दुनिया से मिटा देने की अब तक दम भरता आया है, अब उसके ही एक इस्लामी दहशतगर्द संगठन ‘तालिबान’से हाथ मिलाकर अफगानिस्तान को  अपने रहमोकरम पर छोड़ने जा रहा है,लेकिन इस बीच तालिबान के हमले जारी हैं। इसी 28अगस्त को ही पश्चिमी हेरात प्रान्त में सुरक्षा चौकियों पर उसके हमलों में अफगान सरकार समर्थित मिलिशिया के 14 सदस्य मारे गए हैं।...

संघर्ष, उत्सर्ग,वीरता की शौर्यगाथा क्षत्रिय राजवंश बड़गूजर-सिकरवार-मढाड़

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पुस्तक समीक्षा लेखक - कँुवर अमित सिंह , डॉ . खेमराज राघव , पवन बख्शी समीक्षक - राघेवन्द्र सिंह सिकरवार पूर्व प्रधानचार्य अपने देश में विभिन्न जातियों , वंशों पर अनेकानेक पुस्तिका लिखी गई हैं इनमें से कुछ क्षत्रिय वंशों के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री से परिपूर्ण भी हैं। क्षत्रियों में प्रमुख वंश बड़गूूजर , सिकरवार , सिकरवार , मढाड़ पर कई पुस्तकें पूर्व में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल में प्रकाशित   कुँवर अमित सिंह , डॉ . खेमराज राघव , पवन बख्शी द्वारा लिखित ‘ बड़गूजर - सिकरवार - मढाड़ पुस्तक उन समस्त पुस्तकों में ऐतिहासिक दृष्टिकोण   बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है। इसमें बड़गूजर क्षत्रियों के पूर्वज भगवान राम के पुत्र लव के वंशज लवपुर या लवकोट ( लाहौर ) के अन्तिम राजा कनकसेन का उल्लेख है जो लवकोट से वर्तमान गुजरात के बड़नगर में बस गए और वल्लभी साम्राज्य की स्थापना की।   इनके वंश की   एक शाखा मेवाड़ तथा दूसरी शाखा ढूंढाड़ प्रदेश में आ बस गई...